Sep 04, 2026

उत्तराखंड में वाटरशेड परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीएम धामी को लिखा पत्र,30 सितंबर तक कार्य पूरा करने की डेडलाइन

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देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक विशेष पत्र भेजकर राज्य में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक के तहत जारी परियोजनाओं में तेजी लाने का अनुरोध किया है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया है कि परियोजनाओं की प्रगति और बजट के शत-प्रतिशत उपयोग के आधार पर ही उत्तराखंड को भविष्य में अतिरिक्त केंद्रीय सहायता और नई योजनाएं आवंटित की जाएंगी।

उत्तराखंड में जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और ग्रामीण क्षेत्रों की आजीविका को मजबूत करने के लिए चल रही वाटरशेड परियोजनाओं को अब तेजी से पूरा करने पर केंद्र सरकार ने जोर दिया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक के तहत स्वीकृत परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और उपलब्ध केंद्रीय सहायता के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। केंद्रीय मंत्री ने पत्र में बताया कि वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच उत्तराखंड में वाटरशेड विकास के लिए 15 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं के माध्यम से करीब 0.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजनाओं की कुल स्वीकृत लागत 232.26 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 209.03 करोड़ रुपये निर्धारित है। राज्य को अब तक करीब 113.48 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की जा चुकी है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इन परियोजनाओं की मूल अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी थी। शेष कार्यों को पूरा करने के लिए परियोजनाओं की अवधि बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दी गई है। ऐसे में राज्य के पास अब शेष प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन कार्यों को पूरा करने और निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सीमित समय है। उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य स्तर पर संबंधित विभागों, क्षेत्रीय अधिकारियों और कर्मचारियों को शेष कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश देने का अनुरोध किया है। साथ ही पहले जारी केंद्रीय धनराशि का शत प्रतिशत प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। मानसून की परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र ने इस समय वाटरशेड परियोजनाओं के तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, मृदा नमी संरक्षण और सूखा रोधी उपायों को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि मानसून के दौरान मिलने वाले पानी का अधिकतम संरक्षण कर ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है। इसके लिए चेक डैम, खेत तालाब, जल संचयन संरचनाएं, परकोलेशन टैंक, ड्रेनेज लाइन ट्रीटमेंट और अन्य मृदा एवं नमी संरक्षण से जुड़े कार्यों में तेजी लाने को कहा गया है। पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण के साथ इन गतिविधियों को ग्रामीण आजीविका से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। केंद्र ने वाटरशेड परियोजनाओं के क्रियान्वयन में राज्यों के प्रदर्शन को भविष्य की परियोजनाओं के आवंटन से भी जोड़ दिया है। स्वीकृत कार्यों की पूर्णता, केंद्रीय सहायता के उपयोग और परियोजनाओं की समयबद्ध प्रगति को आगे की योजनाओं में महत्वपूर्ण आधार माना जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक के तहत उत्तराखंड के लिए 31.58 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता आवंटित की गई है। इसमें से 15.79 करोड़ रुपये की राशि परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन के लिए मदर स्वीकृति के रूप में जारी की जा चुकी है। केंद्रीय मंत्री ने संकेत दिया है कि राज्यों के बीच केंद्रीय सहायता के पुनः आवंटन में भी प्रदर्शन को महत्व दिया जाएगा। तेजी से काम करने और उपलब्ध धनराशि का प्रभावी इस्तेमाल करने वाले राज्यों को अतिरिक्त आवंटन में प्राथमिकता दिए जाने पर विचार किया जाएगा। वाटरशेड परियोजनाओं का उद्देश्य केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है। इनके माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और आजीविका के अवसरों को मजबूत करने की भी योजना है। जल उपलब्धता बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में खेती और अन्य आजीविका गतिविधियों को सहारा मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री धामी को भरोसा दिलाया कि भूमि संसाधन विभाग, भारत सरकार की ओर से उत्तराखंड को इस दिशा में हरसंभव सहयोग और सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक के प्रभावी क्रियान्वयन में केंद्र सरकार और केंद्रीय कृषि मंत्री की ओर से दिए जा रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है। अब राज्य सरकार के सामने सितंबर तक शेष परियोजनाओं को गति देने, केंद्रीय सहायता के प्रभावी उपयोग और मानसून के पानी को अधिकतम संरक्षित करने की चुनौती है। यदि तय समयसीमा में कार्य पूरे होते हैं तो उत्तराखंड के ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में जल संरक्षण के साथ प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका के क्षेत्र में भी इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।